Monday, December 26, 2011

कुछ ख्वाब

जिन  आँखों  में  ख्वाब  हो ,
उनमे  अब  नींद  कहा  से  आएगी ,

जब  सारी  दुनिया  सो  जाएगी ,
ये  चुपके  से  उठ  जाएगी ,

कुछ  करने  की  चाहत  होगी ,
कुछ  पाने  की  आशा ,

तोड़  दुनिया  की  जंजीरे ,
अब  देनी  होगी  मेहनत  की  परिभाषा ....

2 comments:

  1. जंजीरें तोडनी ही होंगी ....

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