Wednesday, January 20, 2016

हमारे दरमियां

अप्रदर्शित स्नेह सा है हमारे दरमियां,
                        एक दूसरे का साथ
और प्यारा सा अहसास अब है हमारे दरमियां ,
गुज़ारे है साथ बहुत से हसीन लम्हे हमने ,
इन लम्हों के बागबान अब है हमारे दरमियां,
बीते दिनों कि यादों का अम्बार सा लगा है ,
इन यादों की मिठास का स्वाद अब है हमारे दरमियां ,
फासले चाहे भले ही आ गये हो राहों में ,
                                          फिर भी इन फ़ासलों की करीबियां अब है हमारे दरमियां,
कुछ अनकही सी बातें है कुछ अनसुनी कहानियां ,
बेजुबान शब्दों कि दास्तान अब है हमारे दरमियां,
ये दास्तान ये अहसास ये बागबान ,
कभी न बिखरने देने कि एक शर्त है अब हमारे दरमियां|    

-    श्रुतिमा दीदी के लिए 2012

1 comment:

  1. अच्‍छा लगा आपके ब्‍लॉग पर आकर....आपकी रचनाएं पढकर और आपकी भवनाओं से जुडकर....

    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
    संजय भास्‍कर
    शब्दों की मुस्कुराहट
    http://sanjaybhaskar.blogspot.in

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मैं लौट जाऊंगा - उदय प्रकाश

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