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गति
मैं गति के विपरीत बैठा रफ्तार से आगे बढ़ रही जिंदगी को देख रहा हूं एक एक कर सभी मंजर दूर जा रहे हैं किसी एक स्टेटिक वस्तु को कुछ पल देख ल...
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अंधकार बढ़ता ही जाता है , अब तो ये अँधेरा भी खुद में ही घुटा जाता है , बहुत से अंतर्द्वंद जब आपके ह्रदय में , दे गवाही आपके गुनाह की ...
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जिंदगी जीने के बहाने ना ढूंढिए, जमीं पर हर तरफ आग है , कश्तियों में बैठ किनारा ना ढूंढिए , बहुत खलिश है जज्बातों में अब , ...
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पल पल बदलती दुनिया में कुछ लम्हे ऐसे भी है जो कभी नहीं बदलते तुम्हारे साथ बिताये लम्हे एक स्थिर चट्टान से हैं जो हमेशा मजबूती के साथ हमार...
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