नव सोच ,नव संघर्ष को
नव क्रांति ,नव संकल्प को ,
दृष्टि में हर कल्प को ,
नारी तूने है बनाया.......
नव क्रांति ,नव संकल्प को ,
दृष्टि में हर कल्प को ,
नारी तूने है बनाया.......
मैं गति के विपरीत बैठा रफ्तार से आगे बढ़ रही जिंदगी को देख रहा हूं एक एक कर सभी मंजर दूर जा रहे हैं किसी एक स्टेटिक वस्तु को कुछ पल देख ल...
यकीनन .....
ReplyDeleteबेहतरीन
ReplyDeletesundar..
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